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Prostate farmers: किसानो ने UP में भाजपा की टेंशन बढ़ा दी, हो सकता है बड़ा नुकसान कैसे ?

Written by Pradhyumna vyas
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किसान आंदोलन का कोई हल न निकलता देख पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खाप पंचायतों के साथ बीजेपी की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। राज्य में अप्रैल के महीने में पंचायत चुनाव होते हैं। साथ ही एक साल बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का वातावरण उसके लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। खासकर जाट समुदाय की नाराजगी, जो पिछले वर्षों में ज्यादातर भाजपा के साथ खड़ी रही है।

वर्तमान में किसान आंदोलन का कोई हल नहीं है। सरकार और किसान संगठन दोनों अपने रुख पर अड़े हैं। भाजपा की मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब उत्तर प्रदेश सरकार ने गाजीपुर सीमा को खाली करने और एक विशाल पुलिस बल स्थापित करने की घोषणा की। सीमा खाली नहीं थी लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विरोध शुरू हो गया। खाप पंचायतों की एकजुटता भी बढ़ी और रालोद नेता चौधरी अजीत सिंह भी सक्रिय हो गए। जाट समुदाय की बढ़ती नाराजगी को देखकर भाजपा भी सक्रिय हो गई है।

किसान आंदोलन का कोई हल न निकलता देख पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खाप पंचायतों के साथ बीजेपी की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। राज्य में अप्रैल के महीने में पंचायत चुनाव होते हैं। साथ ही एक साल बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का वातावरण उसके लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। खासकर जाट समुदाय की नाराजगी, जो पिछले वर्षों में ज्यादातर भाजपा के साथ खड़ी रही है।

वर्तमान में किसान आंदोलन का कोई हल नहीं है। सरकार और किसान संगठन दोनों अपने रुख पर अड़े हैं। भाजपा की मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब उत्तर प्रदेश सरकार ने गाजीपुर सीमा को खाली करने और एक विशाल पुलिस बल स्थापित करने की घोषणा की। सीमा खाली नहीं थी लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विरोध शुरू हो गया। खाप पंचायतों की एकजुटता भी बढ़ी और रालोद नेता चौधरी अजीत सिंह भी सक्रिय हो गए। जाट समुदाय की बढ़ती नाराजगी को देखकर भाजपा भी सक्रिय हो गई है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा नेताओं ने हर गांव तक अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाई है। सूत्रों के अनुसार, स्थानीय रूप से सह-संगठन मंत्री कर्मवीर, पंकज सिंह और अन्य नेता लोगों को समझा रहे हैं कि यह सरकार किसानों के खिलाफ नहीं है। वह किसान कानूनों के बारे में भ्रम को दूर करने की कोशिश कर रहा है। राज्य सरकार के मंत्री भी लोगों के बीच जाएंगे और चौपालों पर लोगों से संवाद करके समझाने का प्रयास करेंगे।

भाजपा आगामी पंचायत चुनावों के बारे में अधिक चिंतित है, जिसमें मौजूदा स्थिति से नुकसान हो सकता है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित कई प्रमुख भाजपा नेताओं को भी पश्चिम बंगाल चुनाव की जिम्मेदारी दी गई है। वो चुनाव भी अप्रैल में होने हैं। ऐसे में बीजेपी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। साथ ही, विपक्षी दलों को अपनी जड़ें जमाने का मौका मिल सकता है, जिसका असर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है।

गौरतलब है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 44 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से लगभग 20 सीटों पर जाट समुदाय जीत हासिल करने का फैसला करता है। पिछले विधानसभा चुनाव में, भाजपा को राज्य में 41 प्रतिशत वोट मिले, जिसमें उसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लगभग 44 प्रतिशत वोट मिले। साथ ही, इसका उत्तराखंड पर असर पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश के साथ ही विधानसभा चुनाव भी होने हैं।

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