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CoWIN पोर्टल के हैक होने की खबरें, सरकार ने दिया बड़ा बयान

Written by Yuvraj vyas
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सोशल मीडिया पर गुरुवार को COVID-19 वैक्सीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन किए जाने वाले प्लेटफॉर्म CoWIN से डेटा लीक और हैक होने की खबरें आई थीं. इसको लेकर सरकार ने कहा है कि CoWIN सिस्टम के हैक होने की खबर फेक है और यह पूरी तरह से सुरक्षित है. बहरहाल, इस मामले की जांच कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम द्वारा की जाएगी, जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत सरकार का सबसे अच्छा काउंटर हैकिंग ग्रुप कहा जाता है.

स्वास्थ्य मंत्रालय और इम्पावर्ड ग्रुप ऑन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन (EGVAC) के चेयरमैन आर एस शर्मा ने CoWIN के हैक होने की खबर को गलत बताते हुए कहा कि CoWIN सभी वैक्सीनेशन डेटा को एक सेफ एंड सेक्योर डिजिटल एनवायरमेंट में रखता है.

सरकार ने एक बयान में कहा कि “CoWIN प्लेटफॉर्म के हैक होने की कुछ निराधार मीडिया रिपोर्ट्स आई हैं. प्रथम दृष्टया, ये रिपोर्ट फर्जी प्रतीत होती हैं. हालाँकि, स्वास्थ्य मंत्रालय और EGVAC MietY की कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम द्वारा मामले की जांच करवा रहे हैं.”

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का बयान

  • CoWin  के हैक किए जाने की खबरें फर्जी
  • CoWIN प्लेटफॉर्म के हैक होने की कुछ मीडिया रिपोर्टें निराधार
  • कोरोना वैक्सीन के रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला कोविन सिस्टम पूरी तरह से सुरक्षित
  • जिस डेटा के लीक होने का दावा, वह कोविन पर संग्रहीत ही नहीं
  • कोविन का डाटा सिस्टम के बाहर किसी दूसरी संस्थान से शेयर नहीं किया जाता
  • कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम की ओर से  होगी इसकी जांच

कुछ मीडिया रिपोर्टें निराधार: मंत्रालय सरकार ने ऐसी किसी भी रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि ‘CoWIN’ पोर्टल पूरी तरह से सुरक्षित है और किसी भी भारतीय का डेटा चोरी नहीं हुआ है। समूह (कोविन) के प्रमुख डॉ आर एस शर्मा ने स्पष्ट किया है कि कोविन को कथित रूप से हैक किए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर साझा की जा रही खबरों पर सरकार का ध्यान गया है और जिस डेटा लीक होने का दावा किया जा रहा है, वह कोविन पर संग्रहीत ही नहीं था। इस मामले में होगी जांच  मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि पोर्टल सुरक्षित डिजिटल वातावरण में सभी टीकाकरण डेटा संग्रहीत करता है। बयान में कहा गया है कि मंत्रालय और टीकाकरण पर अधिकार प्राप्त समूह (ईजीवीएसी) इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ‘कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस’ टीम से मामले की जांच करवा रहे हैं।

वहीं EGVAC के अध्यक्ष आरएस शर्मा ने कहा कि CoWIN के डेटा को सिस्टम के बाहर किसी भी संस्था के साथ साझा नहीं किया जाता है. उन्होंने आगे कहा कि, “हमारा ध्यान CoWIN सिस्टम की कथित हैकिंग के बारे में सोशल मीडिया पर प्रसारित समाचार की ओर आकर्षित किया गया है. इस संबंध में हम यह बताना चाहते हैं कि CoWIN सभी टीकाकरण डेटा को एक सेफ और सिक्योर डिजिटल एनवायरमेंट में स्टोर करता है.”

शर्मा ने आगे कहा कि “कोई CoWIN डेटा CoWIN एनवायरमेंट के बाहर किसी भी संस्था के साथ साझा नहीं किया जाता है. इस डेटा लीक में लाभार्थियों के जियो-लोकेशन जैसी जानकारी के लीक होने की बात कही जा रही है लेकिन CoWIN द्वारा इसे कलेक्ट ही नहीं किया जाता है.”

आरोग्य सेतु और उमंग ऐप के अलावा वैक्सीनेशन के लिए कोई भी ऑथेराइज्ड मोबाइल ऐप नहीं है. इन दोनों ही मामलों में वैक्सीनेशन स्लॉट बुक करने के लिए CoWIN पोर्टल में ही लॉगिन करना पड़ता है. CoWIN मे एक पब्लिक एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (APIs) भी हैं जो थर्ड-पार्टी एप्लीकेशन को कुछ जानकारी को एक्सेस करने का मौका देती हैं जिसे यूजर्स के साथ शेयर किया जा सकता है. हालांकि CoWIN में यह सिर्फ रीड एक्सेस तक ही लिमिटेड है.

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