मासूम चेहरा, खाली जेब और जिंदगी और प्यार के बीच जिंदादिली से लड़ता हीरो. 80 के दशक में बनी ज्यादातर फिल्मों का प्लॉट इन्हीं बातोंं के इर्द-गिर्द घूमता नजर आता था. उस दौर में दर्शक क्यूट फेस वाले हीरो की गुड इमेज को बेहद पसंद करते थे. ये वो वक्त था जब मिथुन चक्रवती अपने डिस्को डांस से सबको दीवाना बना चुके थे. साथ ही अमिताभ, जितेंद्र, विनोद खन्ना, धर्मेन्द्र जैसे पॉपुलर सितारे बॉलीवुड की जान हुआ करते थे. इसी दौर में 1981 में बनी फिल्म ‘लवस्टोरी’ के चार्मिंग से, हीरो कुमार गौरव का जादू भी फैंस के सिर पर चढ़कर बोल रहा था.

सितारों की एक ही भीड़ में, एक क्रिकेटर ने अपने क्रिकेट कैरियर को दांव पर लगाकर बॉलीवुड में प्रवेश किया। यह क्रिकेटर था संदीप पाटिल, जो बचपन से ही अभिनेता बनने की इच्छा रखता था। लेकिन उनकी इच्छा तब बढ़ गई जब उनके साथी क्रिकेटर सैयद किरमानी ने उन्हें उनके स्टाइल और लुक्स को देखते हुए फिल्मों में काम करने की सलाह दी। पहले तो संदीप ने इससे बचने की कोशिश की, लेकिन फिल्मों में काम करने की उनकी दबी हुई इच्छा हर दिन उन पर हावी हो गई। गौरतलब है कि उस दशक में बी-टाउन और क्रिकेट के रिश्ते को अच्छी निगाह से नहीं देखा जाता था। जबकि आज के दौर में ज्यादातर क्रिकेटरों ने फिल्मों में अपनी किस्मत आजमाई है।

इस फिल्म के नाम की तरह, संदीप पाटिल भी अपने क्रिकेट प्रशंसकों के बीच एक अजनबी बन गए। दरअसल, संदीप ने 1985 में रिलीज हुई इस फिल्म में अभिनेत्री पूनम ढिल्लों के नायक की भूमिका के लिए हस्ताक्षर किए थे। ऐसा कहा जाता है कि इस फिल्म में साथ काम करने के दौरान दोनों के बीच एक संबंध था। जिसके कारण संदीप पाटिल क्रिकेट से दूर चले गए। इस फिल्म में, क्रिकेटर सैयद किरमानी खलनायक की भूमिका में थे, जबकि वेस्टइंडीज के क्रिकेटर क्लाइव लॉयड इस फिल्म में अतिथि भूमिका में थे। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से फ्लॉप हुई।

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‘माया मिली न राम’ आपने ये कहावत तो जरूर सुनी होगी. ये कहावत उस दौर में इस दाएं हाथ के बल्लेबाज पर ये कहावत सही बैठती दिखी. फिल्म ‘कभी अजनबी थे’ के बुरी तरह क्लीन बोल्ड होने के बाद, संदीप न फिल्मों में चल पाए और न क्रिकेट में वापसी कर सके. उस दौर में हरफनमौला क्रिकेटर के तौर पर माने जाने वाले मोहम्मद अजहरुद्दीन को टीम में संदीप पाटिल की जगह दी गई. इस तरह संदीप के हाथ फिल्म और क्रिकेट दोनों से खाली ही रह गए.

आज के वक्त में बॉलीवुड और क्रिकेटर्स के बीच रिश्ते को सामान्य-सी बात समझा जाता है. साथ ही क्रिकेटर्स और अभिनेत्रियों के बीच लव अफेयर की खबरें भी सुर्खियों में छाई रहती है. लेकिन 80 के शुरुआती दशक तक बॉलीवुड से जुड़ना अपने कॅरियर को खत्म करने जैसा था. इसके पीछे क्रिकेट की जेंटलमैन थ्योरी थी. जब क्रिकेट के काफी सारे नैतिक कानून हुआ करते थे. इस धारणा के कारण भी संदीप पाटिल के लिए क्रिकेट के दरवाजे बंद हो गए

 

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