दोस्तों परेश रावल और अक्षय कुमार की हिट फिल्म ओह माय गॉड हम सब ने बहुत कुछ देखा और हमें फिल्म से बहुत कुछ सीखने को मिला, लेकिन इस फिल्म में कांजी भाई का किरदार निभा रहे परेश रावल ने उस जिज्ञासा ( आस्तिकता ) पर कई सवाल उठाए, जिनका जवाब आम लोग नहीं देते थे। आज हम उन्हीं सवालों को लेकर आए हैं।

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फिल्म में भगवन पर केस किया जाता है और परेश रावल अपनी दलीलें देना शुरू करते हैं जो दर्शकों को काफी लुभावनी लगती है लेकिन हर लुभावनी चीज़ सच नहीं होती, कांजी भाई कहते हैं धार्मिक लोग भगवान का नाम जपते हैं तो यही काम लॉजिक के अनुसार अपने पापा से क्यों नहीं करते, जब आपको चॉकलेट चाहिए तो पापा का नाम जपकर चॉकलेट क्यों नहीं मांगते?

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दोस्तों इसका सीधा सा जवाब ये है की आपके पिता आपके साथ रहते हैं और उन्हें पता है की आपकी क्या जरूरतें हैं, वो आपकी जरूरतें पूरी करते हैं लेकिन फिर भी अगर आपको कुछ और चाहिए तो आप अपने पापा से बोलते जरूर हैं, ठीक वैसे ही जो आपकी किस्मत में है वो तो आपको मिलता ही है लेकिन जब आपको उससे ज्यादा कुछ चाहिए होता है तब आपको कृष्णा कृष्णा करना ही पड़ेगा।

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कांजी भाई कहते हैं की मंदिरों में जो दूध बेकार चला जाता है उसे गरीबों में बाँट देना चाहिए लेकिन लोग भगवन के नाम पर फालतू पैसा खर्च करते हैं, दोस्तों पहली बात तो ये बात एकदम गलत है की मंदिर में प्रसाद वेस्ट होता है, भारत के किसी भी मंदिर में दूध नाली या गटर में नहीं जाता बल्कि देवी देवता को अर्पित किया हुआ दूध सकारात्मक ऊर्जा से चार्ज होता है और उसे प्रसाद के रूप में गरीब और अमीर सबको बनता जाता है जिसे सब मिलकर खाते हैं, दूसरी बात ये की इस देश में सबको अपनी मर्ज़ी से अपना पैसा खर्च करने की आजादी है, अगर किसी का मन किसी भगवान को दूध चढ़ाने का है तो आप उसकी आस्तिकता पर सवाल उठाकर उससे ये नहीं कह सकते की वो पैसे गरीबों को देदो।

कांजी भाई कहते हैं की धर्म इंसान को बेबस, पंगु और आतंकवादी बनाता है लेकिन दोस्तों महापुरषों से लेकर अवतारों के रहन सहन की शैली को ही धर्म का नाम दिया गया है और उसका पालन करना हमारे लिए लाभकारी है, कुछ लोग धर्म के नाम पर हिंसा करते हैं इससे धर्म हिंसक नहीं हो जाता वो लोगों की मानसिकता का सवाल है।

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कांजी भाई कहते हैं भगवान सब जगह है तो उसे मंदिरों में क्यों पूजना, लेकिन दोस्तों वैज्ञानिक भी मानते हैं की साकार के बिना हमारा मन कल्पना करने में असमर्थ होता है तो आप इसी निराकार की कल्पना भी कैसे कर सकते हैं, दूसरी बात यह की जब बहुत सारे लोग एक मानसिकता लेकर एक जगह पर इकट्ठा होते हैं तो उस जगह की ऊर्जा में परिवर्तन आता है, ठीक यही काम हमारे मंदिर करते हैं जहाँ सब अपने मन में पवित्र विचार और आस्तिकता लेकर जाते हैं इसीलिए मंदिरो की जगह आपके बैडरूम में वो काम नहीं हो सकता।

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आशा है कि आपको ये उत्तर सही लगे, अगर आपके पास कोई तर्क है तो कमेंट में जरूर लिखें, पोस्ट की तरह, आपका दिन शुभ हो, धन्यवाद।