ऐसा कहा जाता है कि कहानियां सीमित होती हैं, बस उन्हें कहने का तरीका एक कहानी को दूसरे से अलग बनाता है। हमारी फिल्म इंडस्ट्री 100 साल से ज्यादा पुरानी है, ऐसी कई कहानियां हैं जो साल-दर-साल फिल्मों से प्रेरित रही हैं और सही भी हैं, अगर कोई कहानी अनोखी है तो उसे अलग तरीके से पेश करने में हर्ज क्या है। आज हम पुनर्जन्म के बारे में बात करने जा रहे हैं, इस विषय पर कई फिल्में बनाई गई हैं, जिसमें मधुमती से लेकर करण-अर्जुन तक शामिल हैं, लेकिन आज हम अतीत के जीवन पर आधारित एक कहानी देखते हैं, जिस पर हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक सभी ने फिल्में बनाई हैं। चलिए, शुरू करते हैं: –

1. द रीइंकार्नेशन ऑफ़ पीटर प्राउड

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1975 में IJLie थॉम्पसन द्वारा निर्देशित द रीइंकार्नेशन ऑफ़ पीटर प्राउड, पुनर्जन्म पर आधारित एक थ्रिलर था। फिल्म की कहानी डॉक्टर पीटर प्राउड (माइकल सरज़िन) की है, जो अपने पुनर्जन्म के सपने में रोज़ देखा जाता है। महिला की हत्या करने वाला एक व्यक्ति बार-बार डॉक्टर प्राउड के सपनों में आ रहा है और उस आदमी के मुंह से एक ही नाम निकल रहा है और वह है ‘मार्सिया’। बार-बार उन्हीं सपनों को देखकर हतप्रभ पीटर को वह जगह मिल जाती है जो बार-बार उनके सपनों में आती है और ततः वो मर्सिआ (मार्गोट किडर) तक भी पहुंच जाता है जिसने पिछले जन्म में उसकी हत्या की है और फ़िर खुलते हैं ढेर सारे राज़। फ़िल्म बेहद रोचक थी और इसका क्लाइमेक्स आपके रोंगटे खड़े कर देने में सक्षम है।

2. कर्ज़

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1980 की सुभाष घई की क्लासिक फिल्म कर्ज़ जिसने दशकों तक हिंदी सिनेमा को प्रेरित किया। जब फिल्म रिलीज़ हुई, तो यह इतनी बड़ी हिट नहीं हो सकी, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया और लोगों ने सैटेलाइट के माध्यम से फिल्म देखी, फिल्म ने एक पंथ का दर्जा ले लिया। फिल्म की कहानी राही मासूम रजा द्वारा लिखी गई है और फिल्म का कथानक हू-बहू ‘पीटर पुनर्जन्म का पुनर्जन्म’ से प्रेरित है। कर्ज़ भी एक पुनर्जन्म की कहानी है जिसे भारतीय स्पर्श दिया गया है। मोंटी ओबेरॉय (ऋषि कपूर) एक गायक है, जिसके मस्तिष्क में उसके पिछले जन्म की कुछ यादें हैं। मोंटी पिछले जन्म में रवि था जिसकी हत्या कामिनी (सिमी गरेवाल) नामक महिला ने की थी। इस दौरान मोंटी को टीना (टीना मुनीम) से प्यार हो जाता है और संयोग से टीना उन्हीं जगहों से जुड़ जाती है जहां रवि की मौत हुई थी। मोंटी की अपने पिछले जन्म की यादें गहरी हो जाती हैं और वह अपने हत्यारे तक पहुँच जाता है, अपने अतीत का पीछा करते हुए।

3. ओम शांति ओम

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2007 में रिलीज़ हुई फ़िल्म ‘ओम शांति ओम’ बॉक्स ऑफ़िस में ब्लॉकबस्टर साबित हुई। फ़िल्म कर्ज़ से पूरी तरह प्रेरित है बस पटकथा को अलग तरह से पेश किया गया है। पृष्ठभूमि में फ़िल्म उद्योग है। कहानी है एक जूनियर आर्टिस्ट ओम (शाहरुख़ ख़ान) की जिसे सुपरस्टार शांतिप्रिया (दीपिका पादुकोण) से प्रेम हो जाता है। एक मशहूर निर्देशक मुकेश मेहरा (अर्जुन रामपाल) जिसके शांतिप्रिया के साथ संबंध होते हैं वो उसे आग से जलाकर मारने का प्रयास करता है जिसे बचाते बचाते ओम की भी मृत्यु हो जाती है। 30 साल बाद ओम कपूर एक बहुत बड़ा अभिनेता है और उसके मस्तिष्क उसकी पिछले जन्म की यादें आज भी जिंदा है। ओम जब भी आग देखता है घबरा जाता है। इस दौरान ओम की मुलाकात सैंडी से होती है जो शांतिप्रिया की हमशक्ल है। अपने अतीत से जूझता हुआ ओम कैसे अपनी और शांतिप्रिया की मौत का बदला मुकेश मेहरा से लेता है, यह कहानी का सार है।

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