इसरो चंद्रयान -2 को इतनी कम लागत में चंद्रमा पर पहुंचाने के लिए दृढ़ संकल्पित है कि शायद ही कोई अंतरिक्ष एजेंसी इस रिकॉर्ड को तोड़ सके। चंद्रयान -2 को पहली बार लॉन्च किया गया था, इसके वाहन में कुछ आंतरिक गड़बड़ी के कारण, इसे रोक दिया गया और जब आंतरिक समस्या चली गई तो चंद्रयान -2 को सफलतापूर्वक चंद्रमा के दक्षिणी भाग में उतरने के लिए लॉन्च किया गया।

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तब से लेकर 6 सितंबर 2019 तक कोई समस्या नहीं आई परंतु अभी यह खबर आ रही है कि ‘लैंडर विक्रम‘ का संपर्क इसरो के वैज्ञानिकों से टूट गया है। इसरो के वैज्ञानिकों का कहना है कि लेंडर विक्रम से संपर्क चंद्रमा से 2.1 किलोमीटर की दूरी तक था। परंतु अचानक लेंडर विक्रम से संपर्क टूट गया है। इसरो के वैज्ञानिकों ने अभी यह कहा है कि हम आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं।

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पीएम मोदी भी इसरो सेंटर पर मौजूद थे। तब उन्होंने इसरो के वैज्ञानिकों की पीठ थपथपाई और यह कहा कि यह कोई छोटी अचीवमेंट नहीं है। बल्कि हमारे लिए यह बहुत ही गौरव की बात है कि हम चंद्रमा के उस हिस्से में पहुंच चुके हैं। जहां तक कोई भी स्पेस एजेंसी नहीं पहुंच पाई है। इसरो के वैज्ञानिक अभी आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं तथा लेंडर विक्रम से संपर्क स्थापित करने के लिए सभी तरह के कोशिश कर रहे हैं। पीएम मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों खोया कहा कि आप सभी अपना मन छोटा मत करिए हम आपके साथ हैं।

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इसरो के वैज्ञानिकों को पीएम मोदी जी बधाई देते हुए यह भी कहा कि आपने भारत देश की इतनी सेवा की है कि पूरा भारत देश इसरो के सभी वैज्ञानिकों पर गर्व करती है। पीएम मोदी ने इसरो के सभी वैज्ञानिकों के साथ होने की बात कही है।

पीएम मोदी एक विशेष वायुयान से शुक्रवार को एलहंका एयरबेस पहुंचे। पीएम मोदी ने शुक्रवार देर रात तक लेंडर विक्रम के लैंड होने के ऐतिहासिक क्षण को देखने के लिए उपस्थित रहे। पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए या कहा कि मैं बहुत ही ज्यादा उत्सुक हूं कि मैं इसरो की अंतरिक्ष कार्यक्रम में शामिल होने जा रहा हूं।

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इसरो के वैज्ञानिक सभी तरह से कोशिश कर रही है कि फिर से लेंडर विक्रम से संपर्क हो जाए। चंद्रमा से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी स्थित लंदन विक्रम का इसरो से संपर्क टूट गया था। इसरो के वैज्ञानिक आंकड़ों के मुताबिक अपना अगला कदम बढ़ाने के लिए तैयार हैं। आंकड़ों के मुताबिक कार्य करने का मतलब यह है कि जब कोई भी अंतरिक्ष यान अंतरिक्ष में जाती है तो उससे पहले ही गणित के माध्यम से आकलन कर लिया जाता है, कि वह कितने समय में किस स्थान पर होगा। हमें निराश होने की कोई आवश्यकता नहीं है। क्योंकि इसरो के वैज्ञानिकों को अभी यह पता है कि लेंडर विक्रम कहां पर है परंतु उनका सिर्फ संपर्क नहीं है।

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