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भारतीय जवानों ने चीन को दी चेतावनी, ड्रैगन के पूर्व सैन्य अधिकारी ने सुझाए ये रास्ते

Written by Yuvraj vyas
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भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर लगातार टकराव होते रहते हैं, मगर इन टकरावों को रोकने के लिए चीनी सेना के रिटायर्ड सैन्य अधिकारी ने कुछ रास्ते सुझाए हैं। चीन सीना यानी पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी के रिटायर्ड वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने सुझाव दिया है कि उनके देश और भारत को मौजूदा विश्वास बहाली उपायों का क्रियान्वयन करना चाहिए। साथ ही, सीमा विवाद को टकराव का रूप लेने से रोकने के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से लगे सर्वाधिक खतरनाक क्षेत्रों में ‘बफर जोन’ बनाने के सर्वाधिक साहसिक कदम के साथ इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहिए।

भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी सीमा झड़प के एक साल पूरे होने के मौके पर हांगकांग से प्रकाशित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट समाचार पत्र में मंगलवार को ‘चीन और भारत को सीमा गतिरोध पर आगे बढ़ने के लिए अतीत पर विचार करना चाहिए’ शीर्षक वाले आलेख में पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के वरिष्ठ कर्नल (सेवानिवृत्त) झाउ बो ने कहा, ‘यह जानलेवा घटना खौफनाक थी, जो बल प्रयोग नहीं करने के लिए दोनों देशों के बीच बनी दशकों पुरानी सहमति को तोड़ने के करीब थी।’

पूर्वी लद्दाख में गलवन वॉर मेमोरियल पर शहीदों की याद में आयोजित कार्यक्रम के जरिये चीन को संदेश गया कि वह वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अपनी हद में रहे। भारतीय सीमा पर नजर डालने की अगर हिमाकत की तो पिछले साल 15 जून को जो सबक सिखाया था, वह उसे याद कर ले।

गलवन में भारतीय सेना ने चीनी सैनिकों को जो मात दी थी, उसे कोई भी दुश्मन कभी नहीं भूल पाएगा। चीन की सेना के छक्के छुड़ाने वाली भारतीय सेना की यह 16 बिहार रेजिमेंट थी। इस संघर्ष में हमारे 20 जवान बलिदान हो गए थे। इनमें 16 बिहार रेजिमेंट के कमान अधिकारी भी शामिल थे। इन बलिदानियों को मंगलवार को गलवन वॉर मेमोरियल पर आयोजित कार्यक्रम में विशेष रूप से श्रद्धांजलि दी गई।

शहीदों की याद में पूर्वी लद्दाख में दुरबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी मार्ग पर केएम 120 पोस्ट के निकट गलवन वॉर मेमोरियल बनाया गया है। यहां सभी बलिदानियों के नाम अंकित हैं। इन वीरों की शहादत का एक साल पूरा होने सेना की उत्तरी कमान ने यहां श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में सैन्य अधिकारियों समेत जवानों ने बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी तो एक साल पहले का वह मंजर याद आ गया, जब भारतीय सैनिक शेर की तरह दहाड़ते हुए चीनी सैनिकों पर टूट पड़े थे। तब अपने से कई गुना अधिक चीन के सैनिकों को दुर्गम हालात में भी उल्टे पांव खदेड़ दिया था।

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Yuvraj vyas