Featured

जब बेटी के खरीदारी के शौक के लिए शाहजहाँ ने बना दिया ‘चांदनी चौक’

Written by Yuvraj vyas

एक दिन जब शाहजहाँ को पता चला कि उसकी बेटी जहानारा को खरीदारी का बहुत शौक है, तो उसने इस शौक को अपने तरीके से पूरा करना चाहा. बस इस छोटी सी चीज के लिए शाहजहाँ ने चांदनी चौक मार्किट बनवा दिया.

इसे बनाने के पीछे मकसद सिर्फ एक ही था कि जहानारा को कहीं दूर न जाना पड़े कुछ भी खरीदने के लिए. एक ही जगह पर उसे हर वो चीज मिल जाए जिसकी वह इच्छा जाहिर करें.

तो चलिए जानते हैं कि आखिर किस तरह से शाहजहाँ ने अपनी बेटी के एक छोटे से शौक के लिए पूरा का पूरा मार्किट बसा दिया–

चाँद की ‘चादनी’ से मिला बाज़ार को इसका नाम…
चांदनी चौक बाज़ार आज या कल नहीं बना. इसकी जड़ें मुगल काल से जुड़ी हुई हैं. यह बात है उस समय की जब, शाहजहाँ के हाथों में दिल्ली की सल्तनत थी.

कहते हैं कि अपने शासनकाल में शाहजहाँ ने दिल्ली में कई चीजें बनवाई थीं, जिनमें से एक चांदनी चौक भी है. चांदनी चौक के बनने के पीछे भी एक कहानी बताई जाती है.

कहते हैं कि शाहजहाँ को अपनी बेटी जहानारा बेगम से बहुत लगाव था. वह उसकी खुशी के लिए कुछ भी करने को तैयार था. वहीं दूसरी ओर जहानारा को खरीदारी का बहुत शौक था. वह जगह-जगह जाकर नई-नई चीजें खरीदती रहती थीं.

इसपर शाहजहाँ ने सोचा कि एक ऐसा बाज़ार बनाया जाए, जहां पर जहानारा हर एक चीज खरीद सकती है. एक ऐसा बाज़ार जहां हर बड़ा व्यापारी आ सके. फिर क्या था, शाहजहाँ ने तुरंत ही एक ऐसा बाज़ार बनाने का हुक्म दे दिया.

इसके बाद चांदनी चौक को बसाने का काम शुरू हुआ. कहते हैं कि सन 1650 में इसे बनाना शुरू हो गया था. इसका डिजाइन बहुत ही अलग रखने की बात की गई ताकि हर ओर इसका नाम हो जाए.

इसलिए इसे एक चौकोर आकर में बनाया गया. इसके चारों तरफ बाज़ार की जगह दी गई. वहीं बीच का हिस्सा यमुना नदी के लिए छोड़ दिया गया. कुछ ही वक्त में कारीगरों ने चांदनी चौक के बाज़ार को तैयार भी कर दिया.

बहुत ज्यादा वक्त नहीं लगा व्यापारियों को वहां पर अपनी दुकाने खोलने में. माना जाता है कि उस समय बाज़ार के बीच से यमुना नदी का एक हिस्सा जाता था. यही चांदनी चौक का एक आकर्षण और उसके नाम की वजह बना.

धारणाओं की माने, तो रात के समय चाँद की चांदनी जब नदी के पानी पर पड़ती थी, तो वह बहुत ही दिलकश नजारा होता था. धीरे-धीरे यही इस बाज़ार की पहचाना बनने लगा. इस वजह से ही इसका नाम चांदनी चौक रखा गया.

एक बार जैसे ही चांदनी चौक का बाज़ार बनकर तैयार हुआ हर कोई इसकी ओर आकर्षित होने लगा. शुरुआती समय में, तो यहाँ पर छोटे-मोटे व्यापारी ही आए थे मगर वक्त के साथ सब बदलने लगा.

गुज़रते वक्त के साथ चांदनी चौक एक मशहूर बाज़ार बनने लगा. लोगों की भीड़ यहाँ पर बढ़ने लगी. यूँ तो इसे जहानारा बेगम के लिए बनाया गया था मगर अब आम लोग भी यहाँ खरीदारी के लिए आने लगे थे.

लोगों की इस भीड़ को आते देख कई व्यापारी चांदनी चौक के बाज़ार की ओर खींचे चले आए. माना जाता है कि शुरुआती समय में यहाँ पर चांदी के व्यापार ने काफी जोर पकड़ा था. पूरे भारत से बड़े-बड़े चांदी के व्यापारी यहाँ पर अपनी चांदी को बेचने आते थे.

इतना ही नहीं अधिकाँश लोगों को लगता था कि चांदी के व्यापार के कारण ही इस बाज़ार का नाम चांदनी चौक रखा गया है. हालांकि, सच्चाई तो कुछ और ही थी. सिर्फ देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी कई व्यापारी इस बाज़ार में पहुंचे चीजें खरीदने और बेचने के लिए.

धारणाओं की माने तो, टर्की, चीन और हॉलैंड से कई व्यापारी यहाँ पर आए थे. उस समय दरीबा कलां सड़क काफी मशहूर थी. यहीं पर बेहतरीन मोती, सोना, चांदी और इत्र बेचा जाता था. इन सब के लिए मीलों दूर से लोग आया करते थे.

इतना ही नहीं एक समय पर तो चांदनी चौक को किसी भी खरीदार का स्वर्ग कहा जाता था. इस एक जगह पर उस हर वो चीज मिल जाया करती थी जिसकी उसे तलाश होती थी. यही कारण है कि अपने शुरुआती समय से ही चांदनी चौक इतना प्रसिद्ध रहा.

चांदनी चौक शुरुआत में पूरा एक बाज़ार हुआ करता था मगर फिर इसे अलग-अलग हिस्सों में बाँट दिया गया. इस पूरे बाज़ार को चार भागों में बांटा गया. हर भाग में मौजूद बाज़ार अपनी एक अलग खासियत रखता था.

यह चार भाग थे उर्दू बाज़ार, जोहरी बाज़ार, अशरफी बाज़ार और फतेहपुरी बाज़ार. करीब 1.3 किलोमीटर में फैले इस बाज़ार में 1500 दुकानें थीं, जहां हर एक जरूरत की चीज मिला करती थी.

चांदनी चौक बसाया तो एक मुगल शासक के द्वारा गया था मगर आगे चलकर यह हर धर्म के लिए एक उचित बाज़ार बना गया. यहाँ पर हर धर्म की कोई न कोई पहचान मौजूद है.

दिगंबर जैन लाल मंदिर हो या गौरी शंकर मंदिर. आर्य समाज दीवान हॉल हो या सेंट्रल बैपटिस्ट चर्च. गुरुद्वारा सीस गंज साहिब हो या फिर फतेहपुरी मस्जिद. यहाँ पर हर धर्म के लिए कुछ न कुछ है.

सिर्फ यही नहीं यहाँ पर हर धर्म के व्यापारी भी रहते हैं, जो भारत की एकता को भी दर्शाता है. आज चांदनी चौक के ये बाज़ार काफी बदल गए हैं. हालांकि, इनकी साख आज भी पहले जैसी ही है. पहले कभी यह सिर्फ चांदी के लिए जाना जाता था मगर अब ये एक बड़े होलसेल के मार्किट के रूप में जाना जाता है.

अब यहाँ पुराने बाज़ार की जगह नए बाज़ार ने ले ली है. जैसे नई सड़क आज अपने बुक मार्किट के लिए जाना जाता है. बहुत सस्ते दामों पर यहाँ पर किताबें मिल जाती हैं. वहीं चांदनी चौक चोर बाज़ार के लिए भी मशहूर ख़ास मशहूर है. कहते हैं कि यहाँ पर चोरी का काफी सारा सामान बेचा जाता है.

17वीं शताब्दी से आज तक छत्ता चौक चांदनी चौक में महिलाओं का सबसे पसंदीदा मार्किट बना हुआ है. यहाँ पर इतनी दुकाने हैं वह भी केवल महिलाओं के लिए कि देखकर ही सिर घूम जाए.

भारत अपने मसालों के लिए तो दुनिया भर में जाना जाता ही है और ठीक उसी तरह खारी बावली भी मसालों का काफी बड़ा मार्किट माना जाता है. यहाँ पर इतने प्रकार के मसाले मिलते हैं कि बस नाम लो और मसाला सामने हाज़िर हो जाए.

यही कारण है कि 17वीं शताब्दी के बाद से आज तक यह मसालों के लिए प्रसिद्ध स्थान बना हुआ है. इन सब बाज़ारों के साथ यहाँ किनारी बाज़ार, मोती बाज़ार और मीना बाज़ार जैसे कई और मशहूर बाज़ार भी हैं.

इन बाजारों के मेल के कारण ही तो आज चांदनी चौक जैसा कोई और बाज़ार कहीं देखने को ही नहीं मिलता.

About the author

Yuvraj vyas