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लाडले को प्लास्टिक की बोलत में पिलाती हैं दूध? तो पढ़ लीजिये यह खतरनाक सच

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अगर आप भी अपनी प्यारी को प्लास्टिक की बोतल से दूध पिलाते हैं, तो आपके लिए यह खबर पढ़ना बहुत जरूरी है। वास्तव में, बच्चों के दूध की बोतलों और देश के विभिन्न राज्यों में बेचे जाने वाले सिपर्स में खतना रसायन है। एक शोध में यह बात सामने आई है। भले ही आप बच्चे के स्वास्थ्य के लिए हर छोटी से छोटी चीज का ख्याल रख रहे हों। लेकिन अपने बच्चे को स्वस्थ रखने के लिए हमेशा सतर्क रहना जरूरी है।

सिपर कप में रसायन की मात्रा मिल रही : हाल ही में हुए एक शोध ने सभी को सकते में डाल दिया है। शोध से पता चला है कि छोटे बच्चों की बोतल और सीपर कप में केमिकल की मात्रा पाई जा रही है, जो घातक है। एक विशेष प्रकार का रसायन ‘बिस्फेनॉल-ए’ बच्चों की दूध की बोतल में शोध के दौरान पाया गया, जो बहुत हानिकारक है और इसके प्रभाव से बाद में बच्चों में विभिन्न प्रकार के रोग हो जाते हैं।

टॉक्सिक लिंक की रिपोर्ट : देश के विभिन्न हिस्सों से एकत्र किए गए नमूनों के आधार पर, दिल्ली स्थित टॉक्सिक लिंक ने अपनी अध्ययन रिपोर्ट में दावा किया है कि देश के बाजार में अंधाधुंध रूप से बेची जाने वाली दूध की बोतलें और सिपर बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं हैं। पिछले 4 वर्षों में दूसरी बार जारी किए गए इस अध्ययन से पता चला है कि भारतीय मानक ब्यूरो का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।

घटिया कंपनी वाली बोतलों से रहे सावधान : सस्ती और घटिया कंपनी वाली बोतलें भी केमिकल कोटेड होती हैं और उन्हें मुलायम रखती हैं। इसके अलावा, बोतल लंबे समय तक खराब नहीं होती है। मैक्स अस्पताल, पटपड़गंज के वरिष्ठ डॉ। तपिशा गुप्ता ने बताया कि ‘जब शिशु को बोतल में गर्म दूध या पानी डालकर खिलाया जाता है। तो यह रसायन भी घुल जाता है और बच्चे के शरीर में चला जाता है और शरीर में जाने के बाद यह रसायन पेट और आंतों के बीच का रास्ता बंद कर देता है। जो कभी-कभी जीवन के लिए भी खतरा बन जाता है। इतना ही नहीं, हृदय, किडनी, लिवर और फेफड़े की बीमारी लंबे समय तक दूध के साथ शरीर में पहुंचने वाले रसायनों के कारण हो सकती है।

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Yuvraj vyas

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