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गांधी का हवाला देते हुए ओवैसी ने संसद में फाड़ी नागरिकता संशोधन बिल की कॉपी

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गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में चर्चा के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक पेश किया। इस दौरान विपक्ष ने बिल का विरोध किया। शाह ने कहा कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। यह बिल 0.001% अल्पसंख्यकों के खिलाफ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों ने ऐसा किया और तब किसी ने विरोध नहीं किया।

गृह मंत्री ने उदाहरण दिया कि भारत के संविधान ने 1947 में पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थियों को नागरिकता दी थी। तब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने और लाल कृष्ण आडवाणी उप प्रधानमंत्री बने। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस साबित करती है कि बिल में भेदभाव होता है, तो मैं इसे वापस लूंगा।

Owaisi torn copy of CAB, said- there is going to be another partition

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल की कॉपी यह कहते हुए फाड़ दी कि यह देश को तोड़ने वाला बिल है। ओवैसी ने कहा, “महात्मा गांधी कैसे महात्मा बने, उन्होंने साउथ अफ्रीका के नैशनल रजिस्टर कार्ड को फाड़ दिया था, इसलिए…मैं भी इसको फाड़ता हूं।” वहीं, इसको सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया।

 

बता दे की मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में नागरिकता बिल लोकसभा में पास हो गया था, लेकिन राज्यसभा में अटक गया था। केंद्रीय कैबिनेट से बिल को 4 दिसंबर को मंजूरी मिल गई थी। इस बिल के जरिए अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के गैर-मुस्लिमों (हिंदुओं, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) को भारतीय नागरिकता देने में आसानी होगी।

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Yuvraj vyas

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