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रुद्राक्ष पहनने से नहीं होगी पैसों की कमी, दूर रहती है ये बीमारियां

Written by Yuvraj vyas

रुद्राक्ष यानी वो वस्तु जिसे रुद्र का अक्ष यानी आंसू कहा जाता है. माना जाता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई है और इसको प्राचीन काल से ही आभूषण की तरह पहना जाता रहा है. मान्यताओं के अनुसार रुद्राक्ष इस धरती पर अकेली ऐसी वस्तु है, जिसे मंत्र जाप और ग्रहों को नियंत्रित करने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है. ज्योतिषियों के अनुसार रुद्राक्ष की विशेषताओं और महिमा का बखान शास्त्रों में भी खूब किया गया है.

ये हैं रुद्राक्ष धारण करने के नियम

  • रुद्राक्ष को कलाई, गला और हृदय पर धारण किया जा सकता है.
  • इसे गले में धारण करना सर्वोत्तम होगा. वहीं कलाई में 12, गले में 36 और ह्रदय पर 108 दानों को धारण करना चाहिए.
  • हृदय तक लाल धागे में एक दाना रुद्राक्ष धारण कर सकते हैं.
  • सावन में, सोमवार को और शिवरात्री के दिन रुद्राक्ष धारण करना सबसे अच्छा होता है. रुद्राक्ष धारण करने के पहले उसे शिव जी को समर्पित करना चाहिए.
  • उसी माला या रुद्राक्ष पर मंत्र जाप करना चाहिए.
  • जो भी रुद्राक्ष धारण कर रहा है उसे सात्विक रहना चाहिए और आचरण शुद्ध न रखने पर रुद्राक्ष लाभ नहीं देता.

ये हैं रुद्राक्ष धारण करने के फायदे

  • रुद्राक्ष को लेकर मान्यता है कि इसको धारण करने से कई तरह की शारीरिक समस्याएं दूर हो जाती हैं.
  • वैज्ञानिक परिक्षण में भी यह बात साबित हो चुकी है कि दिल के रोगियों में रुद्राक्ष धारण करने से बहुत फायदा होता है.
  • रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति पर महालक्ष्मी की कृपा होती है. जीवन में सभी सुख सुविधाएं प्राप्त हो जाती हैं.
  • इसे धारण करने से हर तरह की मनोकामना पूरी होती है.
  • रुद्राक्ष धारण करने से कठिन साधना करने के बाद मिलने वाले फल के बराबर लाभ होता है.
  • रुद्रााक्ष धारण करने से व्यक्ति को अपने पापों से मुक्ति मिल जाती है. साथ ही वो भाग्यशाली भी बनते हैं.


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Yuvraj vyas