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राजस्थान में कांग्रेस के लिए यह उपचुनाव क्यों महत्वपूर्ण है? गहलोत की सबसे बड़ी चिंता क्या है? जानें पूरा राजनीतिक गणित

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पुडुचेरी (Puducherry) के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद राजस्थान में कांग्रेस (Congress) और बीजेपी (BJP) की बीच जुबानी जंग छिड़ी हुई है। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok gehlot) और बीजेपी अध्यक्ष सतीश पूनिया (Satish poonia) एक दूसरे पर हमलाकर रहे हैं। पूनिया का आरोप है कि कांग्रेस सभी राज्यों में वादाखिलाफी कर रही है। जिसकी वजह से लोग उन्हें छोड़ रहे हैं। यही हाल राजस्थान का है, वहीं इसके जवाब में मुख्यमंत्री गहलोत बीजेपी पर राज्य की सरकारों को गिराने के लिए साजिश करने का आरोप लगाते दिखते हैं। वह कहते हैं कि भाजपा गलत तरीके से सत्ता हथियाने की कोशिश कर रही है। पांच राज्यों की विधानसभा के साथ होने वाले राजस्थान उपचुनाव भी कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण हैं। पार्टी कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन के बीच चार सीटों पर उपचुनाव जीतने की तैयारी कर रही है। पार्टी को उपचुनावों में किसान आंदोलन का राजनीतिक लाभ मिलने की उम्मीद है, लेकिन उपचुनावों में गुर्जर और मुस्लिम समाज की उदासीनता कांग्रेस के चुनावी गणित को बिगाड़ सकती है।

पार्टी जातीय गणित बनाने में जुटी है
राजस्थान के सुजानगढ़, वल्लभनगर, सहाड़ा और राजसमंद सीटों पर उपचुनाव होने हैं। 2018 के चुनावों में भाजपा ने राजसमंद सीट जीती, जबकि शेष तीन सीटें कांग्रेस के खाते में गईं। ऐसे में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने कांग्रेस की तीन सीटों को बरकरार रखते हुए उन्हें राजसमंद सीट जीतनी होगी। इसलिए पार्टी ने जातिगत अंकगणित बनाने के लिए सभी चार सीटों पर चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है।

सचिन पायलट संपर्क अभियान में लगे रहे
सुजानगढ़ कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद चुनावी तैयारियों और चुनाव प्रचार पर नजर बनाए हुए हैं। इसका एक कारण यह है कि 2018 के चुनावों में कांग्रेस को पारंपरिक वोटों के अलावा गुर्जर समाज के वोट भी मिले। ऐसे में पार्टी के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। पार्टी के एक नेता ने कहा कि सचिन पायलट लगातार लोगों से संपर्क कर रहे हैं और पार्टी को जिताने की अपील कर रहे हैं।

मुस्लिम मतदाता कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चिंता है
चार सीटों के उपचुनाव में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चिंता मुस्लिम मतदाताओं की उदासीनता है। चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा नहीं करने को लेकर गहलोत सरकार से मुस्लिम मतदाता नाराज हैं। राज्य सरकार ने उर्दू शिक्षक और मदरसा पैरा शिक्षक का वादा नहीं रखा है। वहीं, AIMIM को लेकर भी लोगों का रुझान बढ़ा है। अगर असदुद्दीन ओवैसी खुद चुनाव लड़ते हैं या चुनाव लड़ते हैं, तो कांग्रेस को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

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Pradhyumna vyas

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