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भारत में राष्ट्रपति ज्यादा ताकतवर होता है या प्रधानमंत्री , 99% लोग नही जानते यह बात

Written by Yuvraj vyas

भारत का राष्ट्रपति देश का संवैधानिक मुखिया होता है। संविधान में इस सर्वोच्च पद को कई शक्तियां और अधिकार दिए गए हैं। सबसे पहले बात करते हैं कार्यपालिका को लेकर शक्तियों की। संविधान के मुताबिक संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित है और वह अपनी इस शक्ति का इस्तेमाल केंद्रीय मंत्रिमण्डल के जरिए करता है।

देश का शासन चलाने के लिए राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद का गठन करता है, जिसका अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है। आमतौर पर लोकसभा में बहुमत वाले दल या गठबंधन के नेता को प्रधानमंत्री बनाया जाता है। प्रधानमंत्री की सलाह पर वो मंत्रिपरिषद के दूसरे सदस्यों की नियुक्ति करता है। राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्रिपरिषद के किसी सदस्य को बर्ख़ास्त कर सकता है।

हालांकि ऐसे हालात में जब लोकसभा में किसी भी दल या गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत ना हो तो वहां राष्ट्रपति की भूमिका अहम हो जाती है क्योंकि संविधान इस बारे में साफ-साफ कुछ नहीं कहता। लिहाजा यहां पर राष्ट्रपति अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए किसी ऐसे शख्स को प्रधानमंत्री नियुक्त कर सकता है जिसके बारे में उसे यकीन हो कि वो बहुमत साबित कर सकता है और राष्ट्रपति के इसी विवेक पर हमेशा विवाद रहा है।

1979 में गठबंधन सरकारों के दौर की शुरुआत के साथ ही राष्ट्रपति के विवेक पर सवाल उठने शुरू हुए। 1979 में चरण सिंह से लेकर 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी तक 6 ऐसे नेताओं को प्रधानमंत्री बनाया गया जो अल्पमत दल या गठबंधन के नेता थे। लिहाजा 2014 के चुनावों में प्रणब मुखर्जी की भूमिका इस लिहाज से भी अहम होगी कि वो स्पष्ट बहुमत के ना होने पर किसे सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं। इसके अलावा राज्यों की विधानसभा को भंग करने संबंधित शक्ति को लेकर भी राष्ट्रपति विवादों में रहे।

विधेयक को कानून में बदलने के लिए आखिरी मुहर राष्ट्रपति की ही लगती है। लिहाजा ये एक अहम शक्ति है, संसद में पारित विधेयक राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाता है। राष्ट्रपति या तो उस पर अपनी अनुमति देता है या विधेयक पर पुन: विचार करने के लिए संसद को वापस भेजता है। अगर संसद उसे फिर से पारित करती है तो राष्ट्रपति को उसे मंजूर करना ही पड़ता है।

लेकिन कुछ विधेयक ऐसे भी हैं जो राष्ट्रपति की सिफारिश के बगैर संसद में पेश ही नहीं किए जा सकते। जिनमें धन विधेयक, राज्य का निर्माण, नाम या सीमा बदलने संबंधी विधेयक, भूमि अधिग्रहण से सम्बन्धित विधेयक प्रमुख हैं। इसके अलावा राष्ट्रपति को किसी विधेयक पर वीटो का भी अधिकार है।

अब बात करते हैं प्रधान मंत्री की-
भारत के संविधान में प्रधानमंत्री के निर्वाचन एवं चुनाव के लिए कोई विशेष प्रक्रिया नही है। भारतीय संविधान अनुच्छेद का 75 केवल इतना कहता है कि भारत का एक प्रधानमंत्री होगा जिसकी नियुक्ति राष्ट्रपति करेगा। प्रधानमंत्री, मंत्रीपरिषद का नेता होता है। राष्ट्रपति केवल नाममात्र का शासक होता है जबकि प्रमुख कार्यकारी शक्तियां प्रधानमंत्री में निहित होती हैं। अर्थात राष्ट्रपति राष्ट्र का प्रमुख होता है जबकि प्रधानमंत्री सरकार का प्रमुख होता है ।

प्रधान मंत्री की शक्तियां

1. वह राष्ट्र की विदेश नीति को मूर्त रूप दने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ।
2. वह केंद्र सरकार का मुख्य प्रवक्ता होता है ।
3. वह सत्ताधारी दल का नेता होता है ।
4. योजना आयोग, राष्ट्रीय विकास परिषद्, राष्ट्रीय एकता परिषद्, अंतर्राज्यी य परिषद् और राष्ट्रीय जल संसाधन परिषद् का अध्यक्ष होता है।
5. आपातकाल के दौरान राजनीतिक स्तर पर आपदा प्रबंधन का प्रमुख होता है ।
6. वह सेनाओं का राजनीतिक प्रमुख होता है ।

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