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भारत में पहली बार हींग की खेती शुरू हुई

हिमालयन बायोरिसोर्स टेक्नोलॉजी के सीएसआईआर-इंस्टीट्यूट ने भारत में पहली बार हींग की खेती शुरू की है। हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी के क्वारिंग गांव स्थित एक किसान के खेत में 15 अक्टूबर को पहली बार हींग का बीजारोपण हुआ। भारत अफगानिस्तान, ईरान और उज़्बेकिस्तान से 1200 टन हींग/प्रति वर्ष आयात करता है जिस पर करीब ₹730 करोड़ खर्च होते हैं।

गौरतलब है कि भारत के करीब-करीब हर किचन में हींग का इस्तेमाल होता है. भारतीय खाने में इसका भरपूर इस्तेमाल होता है. एक अनुमान के मुताबिक भारत हर साल करीब 600 करोड़ रुपये की हींग का आयात करता है. 

दरअसल हींग पहाड़ों के बीच पाए जाने वाले एक पौधे से निकली चिपचिपा चीज है. पहाड़ों पर रहने वाले लोग इसे इकट्ठा कर हमारे किचन तक पहुंचाते हैं.

ईरान और अफगानिस्तान की पहाड़ियों के बीच सबसे ज्यादा हींग पाई जाती है. यहां पहाड़ी इलाकों में हींग का पौधा पाया जाता है.

जहां तक भारत की बात है तो यहां पर हींग की खेती नहीं होती. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत हर साल करीब 1200 टन कच्चे हींग का आयात करता है. यह मुख्य रूप से ईरान, अफगानिस्तान और उजबेकिस्तान से आता है.

इंडियन एक्सप्रेस ने आईसीएआर के हवाले से लिखा है कि 1963 से 1989 के बीच भारत ने एक बार हींग की खेती करने की कोशिश की थी. लेकिन इसके बारे में कोई रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है.

2017 से एक बार फिर हींग की खेती करने का प्रस्ताव आया. इसके बीच ईरान से आयात किए गए और इसे NBPGR की देखरेख में रखा गया है.

इसके बाद भारतीय कृषि शोध परिषद (ICAR) से मंजूरी मिलने के बाद इस बीज को बोया गया है. इस बारे में 2018 से ही शोध के कार्य चल रहे हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि हींग के पौधे को उगाने में अभी कई चुनौतियां आ रही हैं. सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बीज से अंकुरित होने की दर केवल एक फीसदी है. यानी 100 बीज होने पर उसमें से केवल एक के पौधा के रूप में तब्दील होने की रिपोर्ट है.

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Yuvraj vyas

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