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बाइक-स्कूटर खरीदने की सोच रहे हैं, तो आपको ‘झटका’ देने के लिए तैयार हैं बैंक, ये है वजह

अगली बार जब आप दोपहिया वाहन खरीदने के लिए कंपनी के शोरूम जाएं, तो आपको बड़ा झटका लग सकत है। हो सकता है कि आपको ऑटो लोन लेने में मशक्कत करनी पड़े। बैंकों का एनपपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट) बढ़ने के चलते बैंक कुछ ज्यादा ही सतर्कता बरत रहे हैं।
डिफाल्टर्स की संख्या बढ़ी

बैंक बढ़ते एनपीए से चिंतित हैं और जिसके चलते वे कमर्शियल वाहनों (व्यावसायिक) के बाद दोपहिया वाहनों पर लोन देने में अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं। इसकी वजह है कि इन सेगमेंट्स में लोन न चुका पाने वाली संख्या बढ़ी है। पिछले कुछ महीनों से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ब्याज दरों में कटोती करने की बात कह रहा है। लेकिन बैंक घटी ब्याज दरों का फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंचाना चाहते हैं।
नई फाइनेंस स्कीम्स से कर रहे परहेज
बैंकों के इसी रुख के चलते पिछले कुछ समय से दोपहिया वाहनों के लिए लोन न देने के मामले बढ़े हैं। एक अनुमान के मुताबिक टूव्हीलर सेगमेंट में दो साल पहले जहां 50 फीसदी दोपहियां वाहनों को लोन मिलता था, जो अब घट कर 40 फीसदी तक हो गया है। त्योहारी सीजन में जहां बैंक शानदार फाइनेंस स्कीम्स लॉन्च करते थे, लेकिन एनपीए में बढ़ोतरी होने के चलते बैंक इस साल पहले की तरह सक्रिय भूमिका नहीं निभा रहे हैं।
कमजोर आय वर्ग है खरीदार
बैंकों के इसी रुख के चलते ग्राहक नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों के पास लोन के लिए जाना पड़ रहा हैं या फिर उन्हें कैश में गाड़ी खरीदनी पड़ रही है। वहीं एनबीएफसी बैंकों के मुकाबले दोपहिया वाहनों पर लोन देने के बदले ज्यादा ब्याज वसूल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय संस्थानों के लिए टूव्हीलर सेगमेंट को लोन देना पहली प्राथमिकता नहीं है, क्योंकि इस सेगमेंट में 50 फीसदी से ज्यादा डिमांड सस्ती एंट्री लेवल मोटरसाइकिल्स की है। क्योंकि उनका खरीदार कमजोर आय वाला वर्ग है, जो पहले ही लॉकडाउन की मार से परेशान है।
डीलर भी हैं परेशान
आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक मार्च तक पब्लिक सेक्टर के बैंकों का बेड लोन का अनुपात 11.3 फीसदी था, जो मौजूदा माहौल में अगले साल मार्च 2021 तक बढ़ कर 15.2 फीसदी तक पहुंच जाएगा। वहीं निजी क्षेत्र के बैंकों में यह 4.2 फीसदी से बढ़ कर 7.3 फीसदी तक पहुंच सकता है। वहीं बैंकों के इस रवैये से दोपहिया ऑटो कंपनियां भी परेशान हैं। उनका कहना है कि बैंक हमारी बिक्री का अहम हिस्सा हैं, लेकिन आरबीआई और केंद्र सरकार के एहतियाती कदम उठाने के बाद भी अगस्त तक बैंकों ने दोपहिया वाहनों पर लोन देने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है। जिसके चलते ग्राहकों को लोन लेने में कठिनाई हो रही है, तो वाहन डीलरों की इनवेंट्री में भी इजाफा हो रहा है। वहीं इस अनिश्चितता के माहौल से बैंकों को लग रहा है कि डीलरों को वर्किंग कैपिटल चुकाने में मुश्किल होगी।  



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Yuvraj vyas

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