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पुडुचेरी में सरकार को खोने के लिए खुद कांग्रेस जिम्मेदार, अब चुनाव में उम्मीद…

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पुदुचेरी में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार सोमवार को विधान सभा में बहुमत साबित नहीं कर पाई. विश्वास मत हारने के बाद वहां की नारायणसामी सरकार गिर गई है.
वी नारायणसामी ने कहा है कि उन्होंने, उनके मंत्रियों और कांग्रेस, डीएमके तथा निर्दलीय विधायकों ने उपराज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन को अपने इस्तीफ़े सौंप दिए हैं.
इस्तीफ़ा देने के बाद नारायणसामी ने स्पीकर के फ़ैसले को ग़लत बताते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या बताया.
उन्होंने कहा,”केंद्र की बीजेपी सरकार, एनआर कांग्रेस और एआईएडीएमके ने तीन मनोनीत सदस्यों को वोटिंग करने देकर हमारी सरकार गिरा दी. ये लोकतंत्र की हत्या है. पुदुचेरी और इस देश की जनता उन्हें सबक सिखाएगी.”

विधानसभा चुनाव में बहुत ज्यादा वक्त नहीं है। चुनाव आयोग किसी भी वक्त चुनाव तिथियों का ऐलान कर सकता है। निवर्तमान मुख्यमंत्री नारायणसामी ने भाजपा को सरकार गिराने के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए चुनाव में मुद्दा बनाने का ऐलान किया है, पर पार्टी के कई नेता उनकी राय से सहमत नहीं है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पुडुचेरी में सरकार खोने के लिए भाजपा से ज्यादा खुद कांग्रेस जिम्मेदार है।

2016 में बन गई थी भूमिका
कांग्रेस ने वर्ष 2016 में विधानसभा चुनाव ए नम:शिवायम् के नेतृत्व में लड़ा था। नम:शिवायम् प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे। जीत के बाद उनका मुख्यमंत्री बनना तय था, ज्यादातर विधायक भी उनके साथ थे। पर उस वक्त वी नारायणसामी को मुख्यमंत्री बनाकर भेज दिया गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष होने के नाते नम:शिवायम् नंबर दो की हैसीयत रखते थे। पर एक साल पहले उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया।

उपराज्यपाल से टकराव
मुख्यमंत्री के तौर पर वी नारायणसामी का लगातार उपराज्यपाल से सीधा टकराव भी कांग्रेस के खिलाफ गया। तत्कालीन उपराज्यपाल किरण बेदी से झगड़े के चलते पार्टी चुनाव में किए गए कोई भी वादा पूरा करने में नाकाम रही। इनमें सबसे बड़ा वादा मेडिकल कॉलेज में स्थानीय छात्रों का आरक्षण था। कान्ट्रैक्ट टीचरों की नियुक्ति और अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को मुफ्त चावल देने का वादा भी अधूरा रह गया।

स्थिति भांपने में विफल
पार्टी नेतृत्व भी पुडुचेरी की स्थिति को भांपने में विफल रहा। प्रभारी महासचिव के तौर पर वरिष्ठ नेता मुकुल वासनिक लंबे वक्त तक पुडुचेरी की जिम्मेदारी संभालते रहे हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि प्रभारी महासचिव अपनी भूमिका निभाने में विफल रहे थे, इसलिए उनकी जगह पिछले साल पार्टी नेता दिनेश गुंडुराव को प्रभारी बनाया गया था। मुकुल वासनिक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखने वाले असंतुष्ट नेताओं में शामिल हैं।

चुनाव में नुकसान:
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को ज्यादा उम्मीद नहीं है। वन्नियार जाति ने 2016 के चुनावों में कांग्रेस का समर्थन किया। पुन्नुचेरी में वेंनियर की आबादी लगभग तीस प्रतिशत है। नाम: शिवम के कारण, उन्होंने वन्नियार जाति कांग्रेस का समर्थन किया। ऐसे में वन्नियार जाति को इस बार वोट मिलने की उम्मीद नहीं है। एक प्रमुख भाजपा नेता ने कहा है कि पुदुचेरी की तुलना में तमिलनाडु अधिक महत्वपूर्ण है। पुडुचेरी में जिस तरह से कांग्रेस और डीएमके गठबंधन सरकार को बचाने में नाकाम रहे हैं उससे तमिलनाडु के लोगों में अविश्वास भी पैदा होगा। दूसरी तरफ, सरकार विरोधी माहौल से जूझ रही AIADMK को इससे राहत मिलेगी, क्योंकि भाजपा भी अब अपने गठबंधन में है।
पुदुचेरी में राजनीतिक संकट कैसे गहराया
संकट में घिरी नारायणसामी सरकार को विश्वास मत से एक दिन पहले यानी रविवार को एक और झटका लगा था, क्योंकि सत्ताधारी कांग्रेस-डीएमके गठबंधन के दो और विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया था.
कांग्रेस विधायक के लक्ष्मीनारायण और डीएमके विधायक वेंकटेशन के इस्तीफ़े से विधान सभा में सत्ताधारी गठबंधन का संख्याबल और कम होकर 11 हो गया था, जबकि विपक्ष के पास 14 विधायक थे.
33 सदस्यों वाली विधानसभा में अभी कुल 28 सदस्य हैं. इनमें 3 मनोनीत सदस्य भी शामिल हैं.
लक्ष्मीनारायण और वेंकटेशन ने बताया कि दोनों ने अपने इस्तीफ़े विधान सभा स्पीकर वी पी शिवकोलंधु के घर अलग-अलग जाकर सौंपे.

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Pradhyumna vyas

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