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चीन से जल्‍द हो सकती है जंग, 33 साल में पहली बार सबसे ज्‍यादा अलर्ट पर रही चीनी सेना

Written by Yuvraj vyas

पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर भारतीय सेना के जवाबी कार्रवाई से बौखलाए चीन ने 33 साल बाद पहली बार सेना की जंगी तैयारी को दूसरे सर्वोच्‍च अलर्ट पर रख दिया था। हालांकि चीन सेना की लड़ाकू तैयारी को भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच मुलाकात के बाद कम कर दिया गया। चीनी सेना के एक अधिकारी ने बताया कि इस दौरान बड़े पैमाने पर सैनिकों और हथियारों को अग्रिम मोर्चों पर तैनात किया गया था।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्‍ट ने चीनी सेना के सूत्रों के हवाले से बताया कि इससे पहले इस इलाके में अलर्ट का यह स्‍तर वर्ष 1987 में हुआ था। उस समय सुमदोरोंग चू घाटी में दोनों पक्षों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था और युद्ध की नौबत आ गई थी। पीएलए में अलर्ट के चार स्‍तर हैं। पहला स्‍तर उस समय लागू किया जाता है जब सैन्‍य कमांडरों को लगता है कि अब युद्ध होकर रहेगा।

PLA कमांडर, अधिकारी एवं सैनिक 24 घंटे कर रहे अभ्‍यास
पैगोंग में फायरिंग की घटना के अगले दिन पीएलए के सेंट्रल थिएटर कमांड ने 8 सितं‍बर को वीबो पर जारी बयान में कहा था कि उसे और ज्‍यादा सैनिक तथा हथियारों की तैनाती का आदेश हुआ है। चीनी सेना ने कहा कि उसने कई युद्धाभ्‍यास शुरू किए हैं। उन्‍होंने कहा कि चूंकि तैयारी स्‍तर बढ़ा दिया गया है, इसलिए कमांडर, अधिकारी एवं सैनिक और ज्‍यादा अभ्‍यास 24 घंटे कर रहे हैं।

चीन ने LAC पर झोंक दी है ताकत, 50 हजार सैनिक, मिसाइलें, रॉकेट, फाइटर जेट सब तैनात

चीन ने यहां सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, रॉकेट फोर्स और 150 फाइटर एयरक्राफ्ट भी तैनात कर रखे हैं। ये सब LAC पर हमले की रेंज के अंदर तैनात हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस क्षेत्र में यह सबसे ज्यादा सैन्य तैनाती है। जाहिर है कि भारत से तनाव बढ़ने पर मई के बाद से यह बढ़ता जा रहा है। माना जाता है कि PLA को स्थानीय कमांडर नहीं, सीधे पेइचिंग से कंट्रोल किया जाता है।

पेइचिंग के कहने पर ही पैंगॉन्ंग झील के दक्षिणी ओर चीनी सैनिक भारतीय स्थिति को डेली मॉनिटर करते हैं। PLA ने लाइट टैंक और इन्फैन्ट्री कॉम्बैट वीइकल सीमा पार भेजने की कोशिश है जिन्हें भारतीय सेना ने रोक दिया। चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने इस क्षेत्र में भारी सेना और हथियार तैनात करना तेज कर दिया है। देश के अलग-अलग हिस्सों से सेना यहां बुलाई जा रही है। चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स ने सुरक्षा विश्लेषकों के हवाले से दावा किया है कि एयर डिफेंस, सशस्त्र वाहन, पैराट्रूपर, स्पेशल फोर्स और इन्फैन्ट्री को देशभर के हिस्सों से बुलाकर इस क्षेत्र में लगाया गया है।

PLA के सेंट्रल थिअटर कमांड एयरफोर्स के H-6 बॉम्बर और Y-20 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट ट्रेनिंग मिशन के लिए यहां तैनात किए हैं। लंबी-दूरी के ऑपरेशन, तैनाती के लिए अभ्यास और लाइव-फायर ड्रिल कई हफ्तों से जारी हैं। यह कार्रवाई उत्तरपश्चिम चीन के रेगिस्तान और दक्षिणपश्चिम चीन के तिब्बत क्षेत्र में की जा रही है। चीन सेंट्रल टेलिविजन (CCTV) ने पिछले हफ्ते दावा किया था कि PLA की 71वें ग्रुप सेना का HJ-10 ऐंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम पूर्वी चीन के जियांगसू प्रांत से गोबी रेगिस्तान पहुंचा है।

PLA के तिब्बत मिलिट्री कमांड ने 4,500 मीटर की ऊंचाई पर संयुक्त ब्रिगेड स्ट्राइक एक्सरसाइज की है। PLA की 72वें ग्रुप सेना भी उत्तरपश्चिम में पहुंची है और यहां इसकी एयर डिफेंस ब्रिगेड ने भी लाइव-फायर ड्रिल की हैं जिनमें ऐंटी-एयरक्राफ्ट गन और मिसाइल पर अभ्यास किया गया।

चीनी सेना के सूत्र ने कहा कि सबसे खराब परिस्थिति की तैयारी के लिए चीन ने और ज्‍यादा सैनिक और हथियार वास्‍तविक नियंत्रण रेखा पर भेजा है। चीन ने अपनी तैयारी के स्‍तर को उस समय घटा दिया जब दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच मास्‍को में मुलाकात हुई। दोनों के बीच इस बातचीत के बाद कहा गया था कि तनावपूर्ण स्थिति भारत और चीन के हित में नहीं है। एक अन्‍य सूत्र ने कहा कि हालांकि सतर्कता के स्‍तर को घटा दिया गया है लेकिन अगर परिस्थितियां बदलती हैं तो इसे फिर से बढ़ा दिया जाएगा।

कनाडा की सैन्‍य मैगजीन कन्‍वा डिफेंस रिव्‍यू सैटलाइट तस्‍वीरों की मदद से बताया कि चीनी सैनिक पैंगोंग झील के आसपास बड़े पैमाने पर तैनात हैं। पत्रिका के एडिटर आंद्रेई चांग ने कहा, ‘पीएलए के जेएच-7 बॉम्‍बर अग्रिम मोर्चे के एयरपोर्ट पर हथियारों के साथ पूरी तरह से तैयार हैं जो इस बात का इशारा है कि वे एक्‍शन के लिए तैयार हैं। मुझे डर है कि यह झड़प एक सामान्‍य बात हो सकती है और एलएसी एक और कश्‍मीर में बदल सकता है।’

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