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घर के बाथरूम और रसोई की ये छोटी सी चीज़ करती है परिवार को बर्बाद, आज ही सही करे

Written by Yuvraj vyas

वास्तु शास्त्र में सुख-समृद्धि के लिए कई तरह के नियम बनाए हैं जिसका पालन करने से घर पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। घर पर वास्तु दोष होने से कई तरह की परेशानियां आती है। जिसमें प्रमुख रूप से धन हानि, मानसिक प्रताड़ना और अशांति का सामना करना पड़ता है। वास्तु के अनुसार घर में कुछ वास्तुदोष ऐसे होते हैं जिन्हें आपको भूलकर भी ना करें नजरअंदाज।

दक्षिण मुखी घर होने पर
अगर आपके घर का मुख्य दरवाजा दक्षिण मुखी हो तो इस वास्तु दोष को दूर करने के लिए घर के मुख्य दरवाजे पर पंचमुखी हनुमानजी की फोटो को लगाना चाहिए। इसके अलावा मुख्य द्वार पर शीशा लगाने से भी वास्तु दोष दूर हो जाता है।
एक सीध में कई दरवाजे होने पर
वास्तुदोष में एक सीध में कई दरवाजे होने पर इसे बड़ा वास्तु दोष माना जाता है। अगर आपके घर में ऐसा वास्तु दोष है तो सबसे पहले दरवाजे पर विंड चाइम लगवाना चाहिए।

वास्तु में घर की रसोई के लिए सबसे उपयुक्त दिशा आग्नेय कोण की दिशा मानी जाती है। ऐसे में अगर इस दिशा में रसोई नहीं है तो घर के पूर्व दिशा जिसे ईशान कोण कहते हैं वहां भगवान गणेश की मूर्ति लगाना चाहिए।

कपूर से खत्म करें वास्तु दोष
अगर आपके घर में जिस कोने में वास्तु दोष है वहां पर कपूर के दो टुकड़े रखें तो घर पर हमेशा सकारात्मक ऊर्जा आती है।

ईशान कोण में वास्तुदोष
ईशान कोण घर का सबसे शुभ स्थान होता है। ईशान में भगवान का वास होता है। ऐसे में अगर घर के ईशान कोण में किसी तरह का वास्तु दोष है तो इस दिशा में तुलसी का पौधा लगवाना चाहिए।

1- वास्तुशास्त्र के अनुसार घर का उत्तर-पूर्व कोना बहुत ही शुद्ध और सकारात्मक माना जाता है। इसे ईशान कोण भी कहते हैं। इस जगह पर कभी डस्टबिन या भारी सामान नहीं रखना चाहिए।

2- वास्तु में नल से लगातार पानी का टपकना शुभ नहीं माना जाता। नल से पानी के टपकते रहने से धन का खर्च लगातार बढ़ता जाता है और इससे आर्थिक परेशानियां पैदा होती है।

3- वास्तु के अनुसार घर में रसोई घर पश्चिम दिशा में शुभ मानी जाती है लेकिन इस दिशा में रसोई होने से खर्च भी काफी बढ़ता है।

4- अगर किसी घर की ढ़लान उत्तर पूर्व की दिशा में ऊंचा हो तो इससे धन के आगमन में रुकावट आती है।

5- वास्तु के अनुसार बेडरूम में आईना नहीं होना चाहिए इससे पति-पत्नी में झगड़े बढ़ते हैं। 

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Yuvraj vyas