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क्या अखबार छूने से भी कोरोना फैलता है ?

पिछले कुछ दिनों से व्‍हाट्एप ग्रुप और सोशल मीडिया साइटों पर कई तरह की बहस चल रही हैं. यह नए कोरोना वायरस के इर्द-गिर्द होती है. क्‍या छूना सही है क्‍या गलत है? क्‍या डिलीवर किया गया पैकेट छूना चाहिए? क्‍या ऑनलाइन डिलीवर किए गए ग्रॉसरी और खाने के पैकेट को ले सकते हैं? क्‍या न्‍यूजपेपर छूने से कोरोना फैलता है?

यूएस सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, जीवित कोशिकाओं के बाहर ज्‍यादातर सतहों पर कोरोना वायरस बहुत समय तक जिंदा नहीं रहता है. वायरोलॉजिस्‍ट का कहना है कि जब आप अखबार छूते हैं तो संक्रमण फैलने की आशंका तकरीबन न के बराबर होती है.

कोझिकोड स्थित बेबी मेमोरियल हॉस्पिटल के डॉक्‍टर अनूप कुमार ने कहा कि अखबार को असुरक्षित कहने का कोई तर्क नहीं है. अगर भीड़भाड़ वाली जगह पर अखबार पढ़ रहे हैं तो संक्रमण फैलने का खतरा ज्‍यादा है. लेकिन, इसकी वजह अखबार नहीं, बल्कि यह है कि आप सामाजिक दूरी बनाकर नहीं चल रहे हैं.

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एम्‍स के डायरेक्‍टर डॉक्‍टर रणदीप गुलेरिया के अनुसार, संक्रमित करने के लिए पेपर पर वायरस इतने लंबे समय तक जिंदा नहीं रहते हैं. न ही इनका वितरण कोविड-19 के मरीज करते हैं. लिहाजा, इस तरह का कोई जोखिम नहीं है.

जसलोक और कस्‍तूरबा हॉस्पिटल में संक्रमण रोगों के विशेषज्ञ डॉक्‍टर ओम श्रीवास्‍तव ने कहा कि यह सरासर गलत है. अगर अखबार और पैकेज संक्रमण फैला सकते हैं तो इसके सबूत कहां हैं?

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आईसीएमआर में सेंटर फॉर एडवांस्‍ड रिसर्च इन वॉयरोलॉजी के चीफ डॉक्‍टर टी जेकब जॉन ने कहा कि जब हमारे सामने असली खतरा हो तो हमें कल्‍पनीय खतरों के बारे में सोचकर चिंता करने की जरूरत नहीं है

फोर्टिस सी-डॉक के चेयरमैन डॉक्‍टर अनूप मिश्रा ने कहा कि अखबार से संक्रमण फैलने की आशंका न के बराबर है. लोगों को अफवाहों पर यकीन नहीं करना चाहिए.

इनफेक्शियस डिजीज पर महाराष्‍ट्र सरकार के तकनीकी सलाहकार डॉक्‍टर सुभाष सालुंके के मुताबिक, यहां तक कि जो देश इस महामारी से सबसे ज्‍यादा प्रभावित हैं, वहां भी अखबारों का सर्कुलेशन नहीं बंद है. अखबार को छूना बिल्‍कुल सुरक्षित है.

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आज के दिनों में प्रमुख अखबार काफी उच्‍च तकनीक के साथ प्रिंट होते हैं. इसमें मानवीय हस्‍तक्षेप न के बराबर होता है. इसके अलावा आज के हालातों में अखबारों ने सुरक्षा के कुछ और उपाय भी किए है. ये कदम पाठकों की सुरक्षा को देखते हुए उठाए गए हैं.

ऐसे में आप क्‍यों उन सूचनाओं से दूर रहें जो सटीक और विश्‍वसनीय हैं. जिन्‍हें काफी रिसर्च के बाद प्रकाशित किया जाता है.

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Yuvraj vyas

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