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आजादी के सात दशक बाद भी इस गांव में नहीं बन सकी पक्की सड़क

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 का मतदान होने जा रहा है. उससे पहले एक बार फिर नेताजी दरवाजे पर दिखाई दे रहे हैं. वादे वही पुराने हैं विकास होगा, सड़कें बनेंगी, बिजली मिलेगी. चुनाव के साथ आने वाले ये वादे चुनाव खत्म होते ही गायब भी हो जाते हैं. इन्हीं वादों का इंतजार कर रही है जहानाबाद जिले के काको प्रखंड की ये सड़क. आजादी के सात दशक बाद भी हड़हड़ गांव को एक पक्की सड़क तक नहीं मिल सकी.

ग्रामीणों को सिर्फ इंतजार

जहानाबाद जिले के काको प्रखंड के पिंजोरा पंचायत में आने वाले हड़हड़ गांव के लोग हर चुनाव में अपने आप को ठगा महसूस करते हैं. क्योंकि इस गांव में आजादी के सात दशक गुजर जाने के बावजूद सड़कें बेहाल हैं. लोगों का कहना है कि चुनाव आते ही नेताओं का आना-जाना शुरू हो जाता है और साथ ही आश्वासन का दौर भी. नेताजी कहते हैं अब विकास होगा. अब कच्ची नहीं आप पक्की सड़क पर चलोगे. लेकिन चुनाव के बाद गांव के लोग सिर्फ इंतजार करते हैं.

बड़ी मुश्किल का सामना

गांव के लोगों ने बताया ​कि बारिश के समय में कच्ची सड़क से गुजरना बेहद मुश्किल होता है. बारिश के दिनों में सड़क के कीचड़ में तब्दील हो जाने से वाहनों से आवागमन बंद हो जाता है. वहीं पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है, कीचड़ में पांव फंस जाते हैं, जिसके चलते लोग हाथों में जूते, चप्पल लेकर लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क को पार करते हैं. सबसे ज्यादा परेशानी का सामना तब करना पड़ता है, जब गांव में कोई बीमार पड़ता है.

बीमार व्यक्ति को गांव से मुख्य सड़क तक ले जाने के लिए खाट पर उठाना पड़ता है. गांव के रहने वाले उदय ने बताया कि सड़क निर्माण के लिए जनप्रतिनिधियों से ग्रामीणों द्वारा कई बार गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन पक्की सड़क का निर्माण अब तक नहीं हो सका है.

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Yuvraj vyas

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