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अगर वास्तु के इन नियमों का करेंगे पालन, फिर जीवन में नहीं रहेगी सुख-समृद्धि की कमी

Written by Yuvraj vyas

कभी-कभी बहुत मेहनत करने के बाद भी आपको उसका उचित फल प्राप्त नहीं होता है। कामयाबी की जगह आपको असफलता हाथ आती है। परिणामजन आपके सुख-चैन में अड़चनें आने लगते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसा होना आपके घर में वास्तु दोष होने का संकेत है। ऐसे में वास्तु के कुछ सरल उपाय बता रहे हैं वास्तु एक्सपर्ट अनीता जैन, जिन्हें अपनाकर आप इन परेशानियों को दूर कर सकते हैं।)
जल से जुड़ा उपाय

1- रसोई में पीने के पानी की व्यवस्था ईशान कोण में होनी चाहिए।
2- सकारात्मक ऊर्जा के लिए घर में बने क्यारियों में लगे हुए पौधों को सूखने न दें, इन नियमित रूप से पानी दें।
3- घर में बर्षा का जल हो या पाइप से निकलने वाला, इसका प्रवाह सदैव उत्तर-पूर्व की ओर होना चाहिए।
4- घर के मध्य भाग में कोई कुंआ या पानी की टंकी नहीं होनी चाहिए, जिससे होने पर परिवार को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। “
5- छत पर दक्षिण-पश्चिम दिशा में पानी की टंकी की व्यवस्था करना रहता है, इसी प्रकार बोरिंग या भूमिगत पानी की टंकी उत्तर या पूर्वोत्तर दिशा में होनी चाहिए।

प्रवेशद्वार का रखना
1- घर के मुख्य द्वार पर गणेशजी की प्रतिमा लगाने से वास्तुदोष दूर होते हैं, सुख-समृद्धि आती है।
2- मुख्यद्वार बनाते समय उसकी स्थापना अच्छे मुहूर्त में करनी चाहिए और दीवार के मध्य कभी भी प्रवेशद्वार नहीं बनाना चाहिए।
3- घर का मुख्य द्वार एक ही होना चाहिए और इसको बनाने के लिए शुभ लकड़ी जैसे शीशम, आम, सागवान, नीम आदि का प्रयोग करना चाहिए।
4- घर के द्वार की देहरी खंडित नहीं होनी चाहिए, ऐसा होना अशुभ माना गया है और द्वार के भीतर या बाहर पट-पौंछ रखने के लिए गर्त नहीं बनाना चाहिए।
5- नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए दरवाजे को खुलते और बंद करते समय किसी भी प्रकार की कर्कश ध्वनि नहीं निकलनी चाहिए।

पूजा घर हो ऐसा
1- पूजाघर को हमेशा उत्तर-पूर्व यानि ईशान कोण में बनाना चाहिए ।ऐसा करने से परिवार में सुख की वृद्धि होती है।
2- पूजाघर में शंख जरूर रखें। शंख सा अशांति को हर कर, घर-परिवार में शांति बनाए रखता है।
3- पूजाघर के नीचे या ऊपर शौचालय नहीं होना चाहिए।
4- पूजाघर में महाभारत की प्रतिमाएँ, प्राणी और पक्षियों के चित्र नहीं होने चाहिए। दिवंगतों की तस्वीरें भी यहां नहीं रखी गईं।
5- पूजाघर में धन-संपत्ति छुपाकर रखना शुभ नहीं माना गया है।
6- यहां पर कोई खंड खंड चित्र या मूर्ति नहीं होनी चाहिए।
7- दक्षिण-पश्चिम की दिशा में निर्मित कमरे का प्रयोग पूजा-अर्चना के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

भोजन के नियम
1- भोजन कक्ष में डायनिंग टेबिल को पश्चिम दिशा में रखना वास्तु के अनुसार लाभकारी माना गया है।
2- गैस का चूल्हा किचन प्लेटफार्म के आग्नेय कोण में दोनों ओर से कुछ इंच जगह को छोड़कर अच्छा रहता है।
3- आपका किचन यदि वास्तु सम्मत दिशा में नहीं है तो आप इस वास्तुदोष को दूर करने के लिए उसचन की दक्षिण-पूर्व दिशा में एक लाल बल्ब लगा दें और इसको हमेशा जलने दें।
4- किचन और बाथरूम कभी भी एक सीएच में नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे परिवार के लोगों का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है और जीवन में अनंत है। यदि ऐसा है तो इससे बचने के लिए बाथरूम में बना नमक एक गिलास की कटोरी में रखें और समय-समय पर इसे मोड़ते रहें।
5- सकारात्मक ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने के लिए रसोई की पूर्व या उत्तर की दीवार पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाना बहुत शुभ माना गया है।
6- घर में बरकत के लिए पहली रोटी गौ माता की और सबसे बाद में एक रोटी कुत्ते के लिए निकालनी चाहिए।

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